PM Kusum Yojana भारत में कृषि क्षेत्र को आधुनिक और ऊर्जा-निर्भर बनाने के लिए केंद्र सरकार की ‘प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाअभियान’ (PM-KUSUM) योजना एक क्रांतिकारी कदम साबित हो रही है। परंपरागत रूप से किसान सिंचाई के लिए महंगे डीजल पंपों या बिजली की अनिश्चित आपूर्ति पर निर्भर रहते थे, जिससे खेती की लागत बढ़ जाती थी। मार्च 2026 तक विस्तारित इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना और उनकी बंजर भूमि को आय के स्रोत में बदलना है। अब किसान अपने खेत में केवल फसल ही नहीं, बल्कि सौर ऊर्जा भी पैदा कर सकेंगे।
पीएम-कुसुम योजना के मुख्य लाभ और कार्यप्रणाली PM Kusum Yojana
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) द्वारा संचालित इस योजना के तहत किसानों को अपने खेतों में सोलर पंप और सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने के लिए भारी सब्सिडी प्रदान की जाती है। इस योजना के दोहरे लाभ हैं: पहला, किसानों को सिंचाई के लिए दिन के समय मुफ्त और विश्वसनीय बिजली मिलती है, जिससे डीजल का खर्च शून्य हो जाता है। दूसरा, सोलर पैनल से उत्पादित अतिरिक्त बिजली को किसान सरकारी ग्रिड को बेच सकते हैं, जिससे उन्हें हर महीने एक निश्चित आय प्राप्त होती है। यह मॉडल न केवल खेती को स्मार्ट बनाता है, बल्कि पर्यावरण को भी प्रदूषण मुक्त रखने में मदद करता है।
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पात्रता और बंजर भूमि का व्यावसायिक उपयोग
पीएम-कुसुम योजना का लाभ उठाने के लिए पात्रता का दायरा काफी विस्तृत रखा गया है। व्यक्तिगत किसानों के अलावा, किसान सहकारी समितियां, पंचायतें, किसान उत्पादक संगठन (FPO) और जल उपयोगकर्ता संघ भी इस योजना के तहत आवेदन कर सकते हैं। विशेष रूप से उन किसानों के लिए यह योजना वरदान है जिनके पास खेती के अयोग्य या बंजर जमीन है। वे अपनी इस जमीन पर सोलर पावर प्लांट लगवा सकते हैं या इसे डेवलपर्स को लीज पर दे सकते हैं। इससे बिना किसी अतिरिक्त मेहनत के बंजर भूमि से भी नियमित आय का रास्ता खुल जाता है।
आवेदन प्रक्रिया और सब्सिडी का ढांचा
योजना में शामिल होने की प्रक्रिया को डिजिटल और पारदर्शी बनाया गया है। इच्छुक किसानों को अपने राज्य की नोडल एजेंसी (SNA) या आधिकारिक पीएम-कुसुम पोर्टल पर जाकर पंजीकरण करना होता है। आवेदन के दौरान आधार कार्ड, बैंक पासबुक और भूमि के दस्तावेजों की आवश्यकता होती है। सरकार इस योजना के तहत सोलर पंप की लागत का एक बड़ा हिस्सा (अक्सर 60% तक) सब्सिडी के रूप में वहन करती है, जबकि शेष राशि में से अधिकांश हिस्सा बैंक लोन के रूप में मिल सकता है। किसान को कुल लागत का केवल 10% हिस्सा ही अपनी जेब से देना पड़ता है, जिसे वे बिजली बेचकर होने वाली कमाई से आसानी से चुका सकते हैं।
सुरक्षा और भविष्य की राह
सोलर पंप लगवाने से किसानों को रात में सिंचाई करने की मजबूरी से मुक्ति मिलती है, जो सुरक्षा की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। सरकार ने मार्च 2026 तक के लिए इस योजना के लक्ष्यों को और अधिक व्यापक बनाया है ताकि अधिक से अधिक ग्रामीण क्षेत्रों को सौर ऊर्जा से जोड़ा जा सके। किसानों को सलाह दी जाती है कि वे केवल आधिकारिक सरकारी वेबसाइटों के माध्यम से ही आवेदन करें और किसी भी अनाधिकृत एजेंट या फर्जी पोर्टल के झांसे में न आएं। यह योजना भारतीय कृषि को ‘अन्नदाता’ से ‘ऊर्जादाता’ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।