PM किसान लाभार्थियों के लिए बड़ी अपडेट: पहले करें रजिस्ट्री, वरना हप्ता रुकेगा Pm Kisan Registry

Pm Kisan Registry उत्तर प्रदेश के बांदा जिले समेत विभिन्न क्षेत्रों के किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी जारी की गई है। सरकारी निर्देशों के अनुसार, जिन किसानों ने अभी तक अपनी ‘फार्मर रजिस्ट्री’ (Farmer Registry) की प्रक्रिया पूरी नहीं की है, उन्हें अप्रैल 2026 से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि समेत अन्य सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित होना पड़ सकता है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पारदर्शिता लाने और भूलेख संबंधी विवादों को कम करने के लिए यह रजिस्ट्री अनिवार्य कर दी गई है। बांदा जिले में ही लगभग 25 प्रतिशत किसानों की रजिस्ट्री अभी भी लंबित है, जिससे उनकी आगामी किस्त पर संकट मंडरा रहा है।

फार्मर रजिस्ट्री की अनिवार्यता और वर्तमान स्थिति Pm Kisan Registry

जुलाई 2024 से शुरू हुई फार्मर रजिस्ट्री की प्रक्रिया अब अपने निर्णायक मोड़ पर है। बांदा जिले के आंकड़ों के अनुसार, कुल 2,51,390 पंजीकृत किसानों में से केवल 1,88,708 किसानों की रजिस्ट्री ही पूरी हो सकी है। शेष 62,682 किसान अभी भी इस प्रक्रिया से बाहर हैं। उप कृषि निदेशक के अनुसार, यदि मार्च के अंत तक यह कार्य पूर्ण नहीं होता है, तो शासन के निर्देशों के क्रम में अप्रैल माह से पीएम किसान सम्मान निधि, फसली ऋण, और फसल बीमा जैसी सुविधाओं को रोक दिया जाएगा।

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रजिस्ट्री की राह में आने वाली मुख्य बाधाएं

डेढ़ वर्ष से अधिक समय बीतने के बाद भी शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल न होने के पीछे कई तकनीकी और व्यवहारिक कारण सामने आए हैं:

  • डाटा विसंगति: कई किसानों के आधार कार्ड और खतौनी (भूलेख) में दर्ज नाम या पिता के नाम में अंतर होने के कारण ऑनलाइन सत्यापन नहीं हो पा रहा है।
  • तकनीकी समस्या: जिले के लगभग 211 राजस्व गांवों का भूलेख डाटा पोर्टल पर प्रदर्शित नहीं हो रहा है, जिससे उन गांवों के किसान परेशान हैं।
  • जागरूकता का अभाव: ग्रामीण क्षेत्रों में शिविर लगाने के बावजूद कई किसान अभी भी प्रक्रिया की जटिलता या महत्व को नहीं समझ पाए हैं।

फार्मर रजिस्ट्री के उद्देश्य और लाभ

सरकार ने इस नई व्यवस्था को कई दूरगामी लक्ष्यों के साथ लागू किया है:

  1. पारदर्शिता: केवल पात्र और वास्तविक भू-स्वामियों तक ही सरकारी योजनाओं का लाभ पहुँचाना।
  2. विवादों का निपटारा: एक ही नाम या पिता के नाम वाले किसानों के डाटा को अलग कर जमीन संबंधी विवादों को कम करना।
  3. त्वरित सहायता: आपदा राहत या फसल बीमा की राशि सीधे और बिना किसी देरी के किसान के खाते में भेजना।
  4. डिजिटल डेटाबेस: राज्य स्तर पर किसानों का एक सटीक ऑनलाइन डेटाबेस तैयार करना।

किसानों के लिए आवश्यक कदम

जिन किसानों की रजिस्ट्री अभी तक नहीं हुई है, उन्हें सलाह दी जाती है कि वे तत्काल अपने क्षेत्र के लेखपाल या तहसील कार्यालय से संपर्क करें। यदि आधार और खतौनी के नाम में त्रुटि है, तो उसे दुरुस्त कराने की प्रक्रिया शुरू करें। उप कृषि निदेशक अभय यादव ने पुष्टि की है कि मार्च की समयसीमा समाप्त होने के बाद किसी भी प्रकार की शिथिलता नहीं बरती जाएगी और अपंजीकृत किसानों के नाम लाभार्थी सूची से हटा दिए जाएंगे।

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