PM E-DRIVE योजना का विस्तार 2028 तक: इलेक्ट्रिक वाहनों पर सब्सिडी और नई दरों की पूरी जानकारी

PM E-DRIVE पर्यावरण संरक्षण और ‘नेट जीरो’ उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा देने वाली महत्वाकांक्षी PM E-DRIVE सब्सिडी योजना, जो पहले मार्च 2026 में समाप्त होने वाली थी, उसे अब 2028 तक के लिए बढ़ा दिया गया है। भारी उद्योग मंत्रालय के इस फैसले से न केवल इलेक्ट्रिक वाहन निर्माताओं को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि आम उपभोक्ताओं के लिए भी ई-स्कूटर, ई-बाइक और ई-रिक्शा खरीदना अधिक किफायती बना रहेगा। यह विस्तार पेट्रोल की बढ़ती कीमतों से जूझ रहे मध्यम वर्ग और स्वरोजगार करने वाले चालकों के लिए एक बड़ी राहत है।

इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों (2-Wheelers) के लिए नई सब्सिडी दरें

सरकार ने इलेक्ट्रिक स्कूटर और बाइक्स के लिए सब्सिडी की समय सीमा 31 जुलाई 2026 तक तय की है। हालांकि, योजना के इस चरण में सब्सिडी की राशि को संशोधित किया गया है। अब उपभोक्ताओं को 2,500 रुपये प्रति kWh की दर से वित्तीय सहायता मिलेगी।

  • अधिकतम छूट: एक वाहन पर मिलने वाली कुल सब्सिडी की सीमा 5,000 रुपये निर्धारित की गई है।
  • पात्रता शर्त: यह लाभ केवल उन्हीं इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों पर देय होगा जिनकी एक्स-फैक्ट्री कीमत 1.5 लाख रुपये से कम है।
  • प्रभाव: ओला (Ola), एथर (Ather) और टीवीएस (TVS) जैसे लोकप्रिय ब्रांड्स के बजट मॉडल्स की कीमतें नियंत्रित रहेंगी, जिससे ग्राहकों को स्विच करने में आसानी होगी।

इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों (3-Wheelers) के लिए बड़ी राहत

ई-रिक्शा और ई-कार्ट चलाने वाले छोटे उद्यमियों के लिए सरकार ने और भी लंबी अवधि की राहत दी है। इन वाहनों के लिए सब्सिडी की समय सीमा 31 मार्च 2028 तक बढ़ा दी गई है।

  • सब्सिडी दर: यहाँ भी दर 2,500 रुपये प्रति kWh रखी गई है।
  • अधिकतम लाभ: एक ई-रिक्शा या ई-कार्ट की खरीद पर ग्राहक अधिकतम 12,500 रुपये तक की बचत कर सकते हैं।
  • पात्रता शर्त: वाहन की एक्स-फैक्ट्री कीमत 2.5 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए।
  • सामाजिक प्रभाव: इस फैसले से शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में प्रदूषण मुक्त परिवहन के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और इकोसिस्टम का विकास

PM E-DRIVE योजना का विस्तार केवल वाहनों की खरीद पर छूट तक सीमित नहीं है। सरकार ने इस योजना के तहत देश भर में चार्जिंग स्टेशनों का जाल बिछाने के लिए भी भारी बजट आवंटित किया है। चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में तेजी आने से रेंज की चिंता (Range Anxiety) कम होगी और लोग लंबी दूरी के लिए भी इलेक्ट्रिक वाहनों पर भरोसा कर सकेंगे। साथ ही, सार्वजनिक परिवहन में इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे शहरों की वायु गुणवत्ता में सुधार होगा।

उपभोक्ताओं और उद्योग के लिए भविष्य की राह

भारी उद्योग मंत्रालय के इस दूरदर्शी फैसले से ऑटोमोबाइल सेक्टर में निवेश बढ़ने की उम्मीद है। ईवी निर्माताओं के लिए एक स्थिर नीतिगत ढांचा उपलब्ध होने से वे नई तकनीक और बैटरी अनुसंधान में अधिक निवेश कर सकेंगे। उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे वाहन खरीदते समय डीलर से सब्सिडी की स्थिति और वाहन की एक्स-फैक्ट्री कीमत के बारे में स्पष्ट जानकारी प्राप्त करें। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि सब्सिडी का लाभ सीधे वाहन की कीमत में कटौती (Upfront Discount) के रूप में मिलता है।

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